उत्तराखंड

उत्तरकाशी के गोरशाली में बारिश के बीच सेलकू मेले का भव्य समापन, ग्रामीणों ने देव डोली के संग किया रासो-तांदी नृत्य

उत्तरकाशी: जनपद के गोरशाली गांव में प्रसिद्ध सेलकू मेले का धार्मिक व सांस्कृतिक परंपराओं के साथ भव्य समापन हो गया। खराब मौसम और बारिश के बावजूद ग्रामीणों के उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आई। दिन और रात बारिश के बीच ही ग्रामीणों ने पारंपरिक रासो और तांदी नृत्य की जोरदार प्रस्तुति दी।

मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. महेश उनियाल ने बताया कि यह मेला अत्यंत प्राचीन है और क्षेत्र के आठ गांवों का साझा लोक पर्व है। उन्होंने ‘सेलकू’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा, “सेलकू का अर्थ होता है— ‘सोएगा कौन’। इस मेले में लोग रात भर जागकर रासो नृत्य करते हैं और देव डोलियों का अलौकिक संगम देखने को मिलता है।”

मेले के दौरान सोमेश्वर देवता और नाग देवता की देव डोलियों को श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से नचाया। सुबह के समय देव डोली को स्यालगी सौड में सैर कराने ले जाया गया। इसके पश्चात मंदिर प्रांगण में नाग देवता के पुजारी पंडित सुभाष चंद्र नौटियाल और प्रवीण नौटियाल ने नाग देवता की डोली की पूजा अर्चना की, बाद में ग्रामीणों ने बारिश के बीच ही देव डोलियों संग पारंपरिक नृत्यों का आनंद लिया।

अंतिम चरण में सोमेश्वर देवता का आसन लगा, जहां उपस्थित सभी भक्तों ने देवी-देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद मेले का औपचारिक समापन हुआ।

इस अवसर पर डुंडा ब्लॉक प्रमुख राजदीप परमार , भाजपा के वरिष्ठ नेता सूरत राम नौटियाल, ग्राम प्रधान उपेंद्र रावत, क्षेत्र पंचायत सदस्य शिवम पंवार सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण व श्रद्धालु मौजूद रहे।

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