शिवालिक के छात्रों का कमाल: ‘त्रिनेत्र ’ को मिला पेटेंट, बिना जीपीएस भी देगा सटीक नेविगेशन
शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, देहरादून ने नवाचार और शोध के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम दर्ज की है। संस्थान के बी.टेक (कंप्यूटर साइंस) द्वितीय वर्ष के छात्रों द्वारा विकसित अत्याधुनिक नेविगेशन डिवाइस “त्रिनेत्र” को सफलतापूर्वक पेटेंट प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
यह अभिनव प्रोजेक्ट प्रतिष्ठित स्मार्ट इंडिया हैकथॉन 2025 के अंतर्गत विकसित किया गया। त्रिनेत्र एक मल्टी-सेंसर कॉग्निटिव नेविगेशन डिवाइस है, जिसे विशेष रूप से उन परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है, जहां जीपीएस उपलब्ध नहीं होता या उसकी विश्वसनीयता प्रभावित होती है। डिवाइस की प्रमुख विशेषता यह है कि यह लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट सिग्नल्स-ऑफ-ऑपरच्युनिटी का उपयोग करता है। इसमें एआई-आधारित कॉग्निटिव प्रोसेसिंग सिस्टम लगाया गया है, जो उपलब्ध सिग्नल्स में से सबसे उपयुक्त सिग्नल का चयन करता है। उन्नत मल्टी-सेंसर फ्यूजन तकनीक के माध्यम से यह डिवाइस सब-मीटर स्तर की सटीकता प्रदान करने में सक्षम है।
त्रिनेत्र को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह जैमिंग और स्पूफिंग जैसी आधुनिक तकनीकी चुनौतियों के बावजूद विश्वसनीय प्रदर्शन करता है। साथ ही इसका कॉम्पैक्ट, हैंडहेल्ड और ऊर्जा-कुशल डिजाइन इसे उपयोग में अत्यंत सुविधाजनक बनाता है, जो भविष्य की नेविगेशन तकनीकों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस नवाचार को पेटेंट संख्या 202611004068 के तहत पंजीकृत किया गया है। परियोजना का मार्गदर्शन संस्थान के प्राध्यापक क्षितिज जैन ने किया। इस डिवाइस को विकसित करने वाली टीम में साक्षी कुमारी, अंकित राज, अमन भारद्वाज, शिवम राज एवं शिवम कुमार शामिल हैं, जिन्होंने अपनी तकनीकी दक्षता और नवाचार क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
संस्थान प्रबंधन ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग हमेशा से छात्रों को अनुसंधान, नवाचार और व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता रहा है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि संस्थान के छात्र न केवल अकादमिक रूप से सक्षम हैं, बल्कि वास्तविक जीवन की जटिल समस्याओं के समाधान में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। यह सफलता इंजीनियरिंग नवाचार, सैटेलाइट नेविगेशन तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधानों के क्षेत्र में संस्थान की मजबूत पकड़ को दर्शाती है तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
