Home उत्तराखंड खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आनलाइन पोर्टल का लोकार्पण

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आनलाइन पोर्टल का लोकार्पण

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दवा और खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके लिए अब एक पोर्टल तैयार किया गया है। कोई भी व्यक्ति इस पोर्टल पर शिकायत कर सकता है। स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार मिलावटखोरों को कड़ा संदेश देना चाहती है। ऐसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। आमजन से भी अपेक्षा है कि वे अपनी शिकायतें पोर्टल पर दर्ज कराएं।

स्वास्थ्य मंत्री ने बुधवार को आइटीबीपी रोड स्थित होटल में खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आनलाइन पोर्टल का लोकार्पण किया। वहीं, ईट राइट अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का शुभारंभ भी उन्होंने किया। स्वास्थ्य मंत्री ने हाइजिन रेटिंग व ईट राइट कैंपस के लिए खाद्य कारोबारियों व विभिन्न संस्थान के प्रतिनिधियों को प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए। उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पहली बार इस तरह का कोई पोर्टल विभाग की ओर से लांच किया गया है। इस पोर्टल के माध्यम से विभाग की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है। पोर्टल पर सैंपल लेने से लेकर लैब में पहुंचने और रिजल्ट तक को आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विभाग प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दे रहा है। सुरक्षित आहार, स्वास्थ्य का आधार नारा दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का पूरा प्रयास है कि मिलावटखोरी पर पूरी तरह से नकेल कसी जाए। यह जरूरी है कि लोग को अच्छा खानपान मिले। इसके लिए जनजागरण अभियान चलाए जाएंगे। मिलावटखोरी रोकने के लिए जिला प्रशासन के साथ ही आमजन का सहयोग लेने के निर्देश भी उन्होंने दिए। कैंट विधायक हरबंस कपूर ने खाद्य सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। देश का प्रत्येक नागरिक स्वस्थ होगा तभी देश आगे बढ़ेगा। स्वस्थ जीवन का आधार स्वस्थ खानपान है।
एफडीए के आयुक्त डा. पंकज पांडेय ने ईट राइट अभियान की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समय के साथ खानपान में बहुत बदलाव आ रहे हैं। सही खानपान न होने के कारण लोग तमाम बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सब को देखते हुए हम खाने में सुधार करते हैं तो बहुत सी बीमारियों को दूर रखा जा सकता है। हाइजिन रेटिंग के पीछे भी उद्देश्य यही है कि रेस्टोरेंट में खाने जाने वाले को पता रहे कि वह किस स्तर के प्रतिष्ठान में जा रहा है। इसके लिए रेस्टोरेंट आदि के बाहर रेटिंग भी डिस्प्ले कराई जा रही है। अपर आयुक्त अरुणेंद्र चौहान ने विभाग की गतिविधियों के बारे में जानकारी प्रदान की। उपायुक्त गणेश चंद्र कंडवाल की ओर से सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य महानिदेशक डा. तृप्ति बहुगुणा, आइआइपी के निदेशक डा. अंजन रे, औषधि नियंत्रक हेमंत नेगी, सहायक औषधि नियंत्रक एसएस भंडारी, खाद्य सुरक्षा विभाग के उपायुक्त अनोज थपलियाल, उत्तराखंड फूड प्रोसेसिंग संगठन के संरक्षक अनिल मारवाह के अलावा तमाम खाद्य कारोबारी उपस्थित रहे।

एक माह में एक लाख कारोबारियों का पंजीकरण
राज्य में खाद्य संबंधी कारोबार करने वाले 41 हजार के करीब कारोबारियों ने ही पंजीकरण कराया है। जबकि इनकी तादाद कई ज्यादा है। स्वास्थ्य मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि एक माह तक प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाया जाए और एक लाख से ज्यादा खाद्य कारोबारियों के पंजीकरण किए जाएं। इसी तरह औषधि विभाग भी अभियान चलाए। इससे खाद्य पदार्थों और दवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

लघु कारोबारियों को रियायत की मांग
उत्तराखंड फूड प्रोसेसिंग संगठन के संरक्षक अनिल मारवाह ने लघु कारोबारियों की समस्याएं स्वास्थ्य मंत्री के सामने रखी। उन्होंने कहा कि एमएसएमई के लिए फूड लाइसेंस का सालाना शुल्क पांच हजार से घटाकर एक हजार रुपये किया जाए। एमएसएमई व मल्टीनेशनल कंपनी के लिए एक ही तरह की कंप्लाइंस है। इसमें भी बदलाव किया जाए। वन टाइम लाइसेंस की व्यवस्था लागू करने की मांग भी उन्होंने की। इसके अलावा एमएसएमई के लिए एनुअल रिटर्न खत्म करने, फूड सप्लीमेंट निर्माण इकाइयों को पांच मीट्रिक टन तक लाइसेंस राज्य स्तर पर दिए जाने और लेबलिंग की छोटी-छोटी त्रुटि के लिए पांच से 25 हजार रुपये का जुर्माने का प्राविधान करने की भी मांग उन्होंने की। कहा कि अभी लेबलिंग की  त्रुटि के लिए पांच से तीन लाख तक के जुर्माने का प्राविधान है, जो बहुत अधिक है। स्वास्थ्य मंत्री ने इन समस्याओं का संज्ञान लेते हुए सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

ईट राइट अभियान के तहत संचालित कार्यक्रम:भोग, जैविक भारत, हाईजीन रेटिंग, फूड फोर्टिफिकेशन, ईट राइट स्कूल, ईट राइट कैंपस, क्लीन स्ट्रीट फूड हब, क्लीन एंड फ्रेश फ्रूट एंड वेजिटेबल मार्केट आदि।

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