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दून में छठ पूजा की धूम, बिहारी महासभा ने टपकेश्वर मंदिर मे बांटा दाल भात और कद्दू की सब्जी का प्रसाद

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देशभर में मनाया जाने वाले लोक आस्था का त्योहार छठ पूजा की शुरुआत आज सोमवार 8 नवंबर से हो चुकी है. चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व का आज पहला दिन है. पहले दिन नहाय की विधि होती है और इसके अगले दिन खरना व्रत किया जाता है. छठ पूजा हिंदूओं के सबसे खास और कठिन व्रतों में एक माना जाता है. नहाय खाय के दिन कद्दू/ लौकी और भात का प्रसाद बनता है. इस प्रसाद को खाने के बाद ही व्रती छठ व्रत की शुरुआत करती है.

उत्तराखंड मे भी छठ की धूम…
उत्तराखंड मे भी छठ का पर्व धूम धाम से मनाया जा रहा है बिहारी महासभा द्वारा राजधानी देहरादून के टपकेशवर मंदिर मे अरवा चावल और दाल के साथ कद्दू की सब्जी का प्रसाद वितरण का कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमे बिहारी महासभा के अध्यक्ष ललन सिंह भी मौजुद रहे. आपको बता दें नहाय खाय के दिन चनादाल कद्दू की सब्जी, और अरवा चावल का भात प्रसाद के रूप में बनाया जाता है इस दिन बनने वाले खाने में सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है टपकेशवर मंदिर मे बिहारी महासभा के अध्यक्ष ललन सिंह सहित सचिन चंदन कुमार झा ,कोषाध्यक्ष रितेश कुमार,सह सचिव प्रभात कुमार, कार्यकारिणी के सदस्य आलोक कुमार, अमरेंद्र कुमार, गोविंदगढ़ मंडल के अध्यक्ष विनय कुमार मौजूद रहे।

क्यों खाते हैं कद्दू?

नहाए खाए के दिन खासतौर पर कद्दू की सब्जी बनायी जाती है. व्रत रखने वाले इसे ग्रहण करते हैं. धार्मिक मान्‍यताओं के अलावा इसे खाने के बहुत से फायदें हैं. कद्दू में एंटी-ऑक्सीडेंट्स पर्याप्त मात्रा में होते हैं जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और व्रती बीमारियों से बचे रहते हैं. इसके अलावा कद्दू में डाइटरी फाइबर भरपूर मात्रा में होता है. इसके सेवन से पेट से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाती हैं.

बिहारी महासभा के इस कार्यक्रम में आज मुख्य रूप से टपकेश्वर महादेव मंदिर, प्रेम नगर, चंद्रबनी मंदिर में साफ सफाई करके तीनों स्थानों पर कद्दू भात का कार्यक्रम किया गया स्थानीय लोगों ने और सभा के सदस्यों ने एक साथ बैठकर कर आज का प्रसाद ग्रहण किया छठ पूजा के इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में उत्तराखंड के स्थानीय लोग भी जुड़ रहे हैं और इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों ने भी हिस्सा लिया

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