Home उत्तराखंड राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान का लोकार्पण कार्यक्रम का हुआ प्रसारण

राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान का लोकार्पण कार्यक्रम का हुआ प्रसारण

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  द्वारा आज छत्तीसगढ़ के रायपुर में राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान का लोकार्पण किया गया | विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान (भा० कृ० अनु० परिषद) के उत्तरकाशी जिले में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ द्वारा इसका लाइव टेलीकास्ट किया गया | प्रधानमंत्री द्वारा बटन दबाकर राष्ट्र को इस संस्था की सौगात दी । साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा किसानों के लिए फसलों की 35 नयी उन्नत प्रजातियों को भी विमोचित किया गया |  यह कार्यक्रम वर्चुअल तरीके से आयोजित किया गया था |

लोकार्पण अवसर पर प्रधानमंत्री जी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसानों से संवाद भी किया गया | अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के सपने को साकार करने के लिए रायपुर का यह संस्थान पूरी ताकत लगा देगा और विकास की एक नयी इबारत लिखेगा । कृषि क्षेत्र में तकनीकी के साथ साथ फसलों की उन्नत प्रजातियों के अनुप्रयोग पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीकी एवं उन्नत प्रजातियों के प्रयोग से ना सिर्फ किसानों को लाभ होगा अपितु यह देश के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा | केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल भी कार्यक्रम में मौजूद रहे | इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ चित्रांगद सिंह राघव के मार्गदर्शन में केन्द्र में एक कृषक गोष्ठी एवं कृषक वैज्ञानिक संवाद का आयोजन किया गया जिसमें केंद्र के उद्यान विज्ञान विशेषज्ञ डॉ पंकज नौटियाल द्वारा किसानों को केन्द्र का परिचय कराने के साथ ही केन्द्र में चलायमान विभिन्न गतिविधियों के बारे में बताया | कार्यक्रम के शुभारम्भ अवसर पर नगर पालिका परिषद चिन्यालीसौड़ की  अध्यक्षा बीना बिष्ट बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रही | कार्यक्रम की मुख्य अतिथि  बीना बिष्ट एवं पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख  जोत सिंह बिष्ट द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि केन्द्र द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम युवाओ को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करने में काफी लाभकारी सिद्ध हो रहे है | केंद्र के कृषि प्रसार विशेषज्ञ डॉ गौरव पपनै ने मंच के सफल संचालन के साथ ही किसानों को विभिन्न जानकारियों से अवगत कराया | कार्यक्रम में परम्परागत कृषि विकास योजना से जुड़े किसानों को जैविक कृषि से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी से अवगत कराया गया साथ ही उन्हें जैविक प्रक्षेत्र में भ्रमण भी कराया गया जिसमें उन्हें केंचुआ खाद बनाने एवं टेट्रावर्मी बेड लगाने की विधियों के बारे में जानकारी दी गयी | इस दौरान केन्द्र की पहल पर जिलेभर से लगभग 100 कृषकों एवं विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में अपना पंजीकरण करवाया और इस कार्यक्रम का लाभ उठाया | कार्यक्रम में केंद्र के नीरज जोशी, रोहिणी खोब्रागडे, वरुण सुप्याल, ख्याली राम, रीतिका भास्कर , केंद्र में ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों से आये बी एस सी कृषि के प्रशिक्षु छात्र छात्राएं मौजूद रहे |

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