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1 साल में 1 लाख 10 हजार से ज्यादा महिलाओं ने उठाया खुशियों की सवारी योजना का लाभ

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राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग के विशेष प्रयासों से प्रदेश में 102 (खुशियों की सवारी) सेवा विगत वर्ष सितम्बर माह से निरन्तर संचालित हो रही है। 2 वर्षों से भी अधिक समय से बन्द पड़ी इस सेवा की प्रदेश की जनता ने फिर से शुरू होने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। लेकिन बीते वर्ष माह 7 सितम्बर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डा0 धन सिंह रावत ने प्रदेश की जनता को 128 खुशियों की सवारी सेवा वाहनो को हरी झंडी दिखाकर उनकी आशाओं को मानो पंख लगा दिये। जिसके बाद मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के निरन्तर मिल रहे विशेष सहयोग से आज यह सेवा नित नये आयाम छू रही है। इस सेवा के शुरू होने के बाद से जहां गर्भवती महिलाओं को प्रसव उपरान्त निःशुल्क घर छोड़ने की सुविधा प्रदान की जा रही है वहीं गर्भवती महिलाओं को अल्ट्राउण्ड कराने के लिए भी घर से सरकारी अस्पताल और अस्पताल से वापस घर भी छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आर0वी0एस0के0) लाभार्थियों के साथ-साथ एक वर्ष तक के नवजात शिशुओं को भी उपचार के उपरान्त घर तक निःशुल्क घर तक छोड़ा जा रहा है। प्रदेश में 102 खुशियों की सवारी सेवा का संचालन कर रही संस्था मै0 कम्युनिटी एक्शन थ्रू मोटीवेशन प्रोग्राम (कैम्प) के विशेष प्रयास से यह सेवा आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रही है। जिसके तहत माह सितम्बर 2021-अगस्त 2022 तक 1 वर्ष के अन्दर कुल 1 लाख 10 हजार 245 प्रदेश की गर्भवती महिलाओं को यह सेवा प्रदान की गयी है। ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में इस सेवा के चलते लोगों में खुशी उनकी चेहरों पर साफ तौर पर देखी जा सकती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से संचालित हो रही इस सेवा से जहां प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिल रहा है वहीं इस निःशुल्क सेवा के लिए महिलाएं प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग का आभार जता रही है। कैम्प संस्था के जी0एम0 प्रोजेक्ट्स अनिल शर्मा ने खुशियों की सवारी सेवा संचालन का आज एक वर्ष पूर्ण होने पर सभी सहयोगियों, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों विशेष कर मुख्यमंत्री और स्वस्थ्य मंत्री का सेवा के सफल संचालन हेतु आभार जताया है। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य विभाग और संस्था के विशेष प्रयासों से इस सेवा को प्रदेश में ही नहीं अपितु देश के लिए भी आर्दश सेवा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही जनपदवार इस सेवा के लाभार्थियों की अगर बात करें तो वे काफी हद तक प्रभावित करने वाले है।

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