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देश की 15वीं राष्ट्रपति बनीं द्रौपदी मुर्मू, सर्वोच्च संवैधानिक पद संभालने वाली पहली आदिवासी महिला और स्वतंत्र भारत में पैदा होने वाली पहली राष्ट्रपति

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द्रौपदी मुर्मू ने देश के 15वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली हैं। मुर्मू देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं सर्वोच्च संवैधानिक पद संभालने वाली पहली आदिवासी महिला और स्वतंत्र भारत में पैदा होने वाली पहली राष्ट्रपति हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण ने उन्हें शपथ दिलाई। इस मौके पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि मैंने अपनी जीवन यात्रा ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से शुरू की थी। मैं जिस पृष्ठभूमि से आती हूंए वहां मेरे लिये प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करना भी एक सपने जैसा ही था। लेकिन अनेक बाधाओं के बावजूद मेरा संकल्प दृढ़ रहा और मैं कॉलेज जाने वाली अपने गांव की पहली बेटी बनी।

आदिवासी परिवार में जन्मीं द्रौपदी मुर्मू की शादी 1980 में श्याम चरन मुर्मू से हुई। शादी के बाद एक के बाद एक दुखों के पहाड़ टूटे। पहले पति का साथ छूटा फिर बेटे भी नहीं रहे। द्रौपदी मुर्मू ने भुवनेश्वर के रामादेवी महिला कॉलेज से बीए किया। पति स्व श्याम चरन मुर्मु के निधन के बाद बेटी इतिश्री मुर्मु की परवरिश की, और अपना राजनीतिक कैरियर शुरू किया|

राजनीतिक कॅरियर—
2000-2004, ओडिशा की रायरंगपुर विधानसभा सीट से विधायक बनीं और स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनीं। 2000-2002 तक वाणिज्य और परिवहन के लिए स्वतंत्र प्रभार और 6 अगस्त 2002 से मई तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री थीं।

2004-2009- द्रौपदी मुर्मू दोबारा विधायक बनीं|2015-2021–द्रौपदी मुर्मू ओडिशा की पहली आदिवासी और महिला राज्यपाल बनीं

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