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हरेला बायोडायवर्सिटी महोत्सव में नौला फाउंडेशन के सहयोग से रौपे गए 70 फलदार पौधे

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वीरांगना समूह उत्तरकाशी की मातृशक्ति ने देवीधार के निकट बैजकोट धनारी हिमालय स्कूल के कैम्पस में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये व गीतों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया गढ़वाल के पराम्परागत व्यंजनों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। नौला फाउंडेशन के सहयोग से रूद्राक्ष व फलदार पौधे रोपित किए व जल स्रोतों के संरक्षण व हरेला बायोडायवर्सिटी महोत्सव पर प्रकृति संरक्षण के लिए संकल्प लिया गया। वीरांगना सुधा गुप्ता ने कहा कि पवित्र स्थलों पर विभिन्न धार्मिक पौधों का रोपण करके पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करेंगे। वीरांगना महिलाओं ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए व कहा कि वनों के विकास के कारण अधिकांश नौले, धारे और गाड गदेरे सूख रहे हैं। खेत बंजर होते जा रहे हैं। जलते जंगल बची हुई खुशहाली छीन लेते हैं। इस कारण भी लोग रोजगार की तलाश में पलायन कर मैदानों का रुख करते हैं। जबकि प्राकृतिक झरने हिमालय क्षेत्र में जल का एकमात्र स्रोत होने के साथ ही मैदानी क्षेत्र की नदियों के प्रवाह में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पिछले कुछ दशकों में हिमालय क्षेत्र में हुए अनियंत्रित शहरीकरण, वनोन्मूलन और जल के अनियंत्रित दोहन से इस क्षेत्र के संवेदनशील पारितंत्र को गंभीर क्षति हुई है। सरकार की योजनाएँ थोड़े समय के लिये राहत प्रदान करने में तो सफल रही हैं परंतु एक समग्र कार्ययोजना और सभी हितधारकों के सहयोग के अभाव में समय के साथ-साथ इस क्षेत्र में जल-संकट की समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिये सभी हितधारको द्वारा सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा दिया जाए तथा भविष्य में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में विकास और प्रकृति के बीच समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाना अत्यंत आवश्यक है साथ ही वनाग्नि रोकने के साथ-साथ वृहद स्तर पर वृक्षारोपण किया जाना भी जरूरी है। इस अवसर पर संगीता जोशी, रमा डोभाल, साधना जोशी, विमला बगियाल, सावित्री सकलानी, जशोदा पंवार, निधि बुटोला, मुकरता गोड़, रजनी चौहान, जल्मा राणा, तनुजा बिष्ट, ललिता सेमवाल सहित अनेकों वीरांगना मातृशक्ति उपस्थित थी।

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