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दून मेडिकल कालेज से जुड़ेंगे 100 पीएचसी व सीएचसी टेलीमेडिसिन के जरिए मिलेगा विशेषज्ञ परामर्श

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दून समेत चार जिलों की 100 पीएचसी/सीएचसी के मरीज अब टेलीमेडिसिन के जरिए दून मेडिकल कालेज के विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श ले पाएंगे। इसके लिए मेडिकल कालेज प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। यह सुविधा आगामी 25 जुलाई से शुरू कर दी जाएगी। जिसके बाद उत्तराखंड इस सुïिवधा को शुरू करने वाला 14वां राज्य बन जाएगा।

दून मेडिकल कालेज सभागार में प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना की अध्यक्षता में टेलीमेडिसिन सुविधा को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। जिसमें टेलीमेडिसिन सोसाइटी आफ इंडिया के सचिव डा. मूर्ति व राज्य में इस योजना पर काम कर रही धनुष इन्फोटेक लिमिटेड के विकास राणा भी मौजूद रहे। बताया गया कि इस योजना का हब एंड स्पोक माडल लांच होने से दून मेडिकल कालेज, श्रीनगर एवं हल्द्वानी मेडिकल कालेज से 100-100 पीएससी / सीएचसी को जोड़ा जाएगा। जिसमें सिर्फ विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा ओपीडी समय में उपलब्ध होगी। इसकी फंडिंग विश्व स्वास्थ्य संगठन के माध्यम से की जा रही है। कुछ सुदूरवर्ती क्षेत्रों में इंटरनेट की कनेक्टिविटी के लिए इसरो बैैंगलुरु से टाइअप किया गया है।
प्राचार्य ने बताया कि टेलीमेडिसिन सुविधा शुरू होने से दूरदराज के क्षेत्र के मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा। दून मेडिकल कालेज के टेलीमेडिसिन सेंटर से देहरादून, हरिद्वार, टिहरी व उत्तरकाशी की 100 सीएचसी व पीएचसी जुड़ेंगे। विशेषज्ञ चिकित्सक इन सीएचसी व पीएचसी में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री देखकर उपचार देंगे। टेली मेडिसिन से मरीजों का रेफरल लोड भी कम होगा। उन्हें प्राथमिक स्तर पर ही उपचार मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि कई मरीज यहां आपरेशन करवा कर दोबारा दिखाने आते हैं। उनको इतनी दूर ना आकर टेलीमेडिसिन के जरिए नजदीक ही चिकित्सक की सलाह मिल जाएगी। जिन मरीजों को आपरेशन के पहले जांच या सलाह की जरूरत है वह भी इस सेवा का लाभ ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से विशेषज्ञ चिकित्सकों की सुविधाओं को सुदूर दुर्गम क्षेत्रों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि गुजरात, केरल, तमिलनाडु आदि राज्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से टेली ओपथामोलाजी ओपीडी का संचालन किया जा रहा है। जिसमें काला मोतिया, सफेद मोतिया एवं डायबिटिक रेटिनोपैथी से होने वाली अंधता को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रिवेंटिव मेडिसिन ज्यादा बेहतर विकल्प है। क्योंकि क्यूरेटिव मेडिसिन का लाभ सिर्फ उसी मरीज को मिलता है जिसको बीमारी हुई है। स्वस्थ व्यक्ति को भी बीमारी से बचाने के लिए प्रिवेंटिव मेडिसिन का महत्व कोरोना काल में और भी अधिक बढ़ गया है और लोग इसका व्यावहारिकता में लाने का प्रयास कर रहे हैैं। इस दौरान डा. सुशील ओझा सहित अस्पताल के अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे।

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