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जल निगम व जल संस्थान को राजकीय विभाग बनाने को लेकर कर्मचारी लामबंद, 28 दिसंबर से करेंगे आमरण अनशन

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रविवार को  उत्तराखंड पेयजल निगम, अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति द्वारा दिनांक 28 12 2021 से प्रस्तावित आमरण अनशन के क्रम में ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई . ऑनलाइन बैठक में जल संस्थान संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष  रमेश बिंजोला एवं जल संस्थान के अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे.
बैठक में जल निगम व जल संस्थान के पदाधिकारियों द्वारा जल निगम व जल संस्थान को राजकीय विभाग बनाने व प्रति माह नियमित कोषागार से वेतन दिलाने का शासनादेश जारी कराने का संकल्प लिया गया.

बैठक में एकमत से चर्चा की गई की जब प्रशासकीय विभाग के सचिव व पेयजल मंत्री द्वारा वित्त विभाग के अधिकारियों से दूरभाष पर विचार विमर्श करने के उपरांत ही कोषागार से वेतन वितरण करने का निर्णय लिया गया था तथा इससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त व्यवहार भार भी नहीं आ रहा है, तो वित्त विभाग द्वारा शासनादेश जारी होने में अड़ंगा लगाना निंदनीय है एवं उत्तराखंड राज्य के विकास के लिए बाधक है.

उत्तराखंड राज्य के इन अदूरदर्शी वित्त विभाग के अधिकारियों द्वारा राज्य की जनता की अनदेखी की जा रही है और राज्य की जनता को पेयजल जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर में निजीकरण की ओर धकेलने की साजिश की जा रही है . राज्य सरकार की अपनी एजेंसी जल निगम के होते हुए भी अन्य बाहरी एजेंसियों से पेयजल व सीवरेज के कार्य कराए जा रहे हैं, जिनके द्वारा अनाप-शनाप तरीके से अनियोजित कार्य कराया जा रहे हैं ,जिसका दुष्परिणाम अंततः राज्य की जनता को भुगतना पड़ेगा । पूर्व में ADB के द्वारा कराए गए कार्यों का भी कोई प्रतिफल राज्य की जनता को नहीं मिला, उसके बाद भी USDDA के नाम पर लगभग 2000 करोड़ के कार्य शहरी विकास विभाग द्वारा स्वयं कराये जा रहे हैं। अनियोजित तरीके से कार्य कराये जाने से राज्य के राजस्व की हानि हो रही है। शहरी विकास विभाग द्वारा विभिन्न माध्यमों से लोन लेकर अनियोजित कार्य कराए जा रहे हैं और इसमें वित्त विभाग का पूरा सहयोग प्राप्त हो रहा है, वित्त विभाग यह नहीं चाहता कि राज्य में पेयजल विभाग मजबूत हो और समेकित रूप से राज्य का नियोजित विकास हो । यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि एडीबी के कार्यों की जांच ना करा कर उन्हीं अधिकारियों द्वारा अब USDDA के अंतर्गत सीवरेज के कार्य कराए जा रहे हैं ,जिनका कोई वास्तविक लाभ राज्य को नहीं मिलेगा . एडीबी के द्वारा लिए जा रहे लोन में राज्य के माननीय विधायकों का भी मार्गदर्शन नहीं लिया जाता है, जबकि पेयजल निगम व जल संस्थान द्वारा कराए जा रहे कार्य अत्यंत आवश्यकता वाले होते हैं और राज्य सरकार की प्राथमिकता के अनुसार कराए जाते हैं. लेकिन राज्य के वित्त विभाग इन सब से आंख मूंदे हुए है और पूरे भ्रष्टाचार में सहभागी बना हुआ है.

पेयजल निगम व जल संस्थान को समस्त वेतन अनुदान के रूप में मिलता है ,लाभ हानि के रूप में इसको देखने का प्रयास करना वित्त विभाग के अधिकारियों की संकुचित सोच और एक गंभीर साजिश का हिस्सा है. राज्य में एक मजबूत पेयजल विभाग ना होने के कारण अभियंताओं की नियमित नियुक्ति नहीं हो पाती है तथा जो अभियंता नियुक्त भी होते हैं वह पेयजल निगम व जल संस्थान की दुर्दशा देखकर विभाग छोड़ कर चले जाते हैं, ऐसे में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का सपना की राज्य का पानी व राज्य का जवानी राज्य के काम आए दोनों पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा हो रहा है। बैठक में एक मत से मांग की गई कि ऐसे अधिकारियों को चिन्हित कर मुख्यमंत्री जी द्वारा दंडित किया जाए। विभाग के अधिकारी इस हद तक निरंकुश हो गए हैं कि उनके द्वारा पेयजल मंत्री जी के प्रोटोकॉल का भी पालन नहीं किया जा रहा है.

 

अतः निर्णय लिया गया कि दिनांक 28.10.2021 से आमरण अनशन मांग पूरी होने तक जारी रहेगा ,चाहे इसके लिए पेयजल निगम के कार्मिकों को कोई भी बलिदान देना पड़े.

उक्त के क्रम में कल दिनांक 27 दिसम्बर 2021 को प्रधान कार्यालय पेयजल निगम में प्रातः 11:00 से अपरान्ह 01:00 बजे तक गेट मीटिंग भी आयोजित की जाएगी।
,जिसमें उत्तराखंड पेयजल निगम व जल संस्थान के कार्मिक हिस्सा लेंगे. यदि सरकार द्वारा मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया तो उत्तराखंड पेयजल निगम व जल संस्थान के कार्मिक हड़ताल पर जाने में भी संकोच नहीं करेंगे.

इस दौरान समन्वय समिति के अध्यक्ष इं0 जितेंद्र देव, महामंत्री विजय खाली, जल संस्थान के संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष रमेश बिंजोला ,सौरभ शर्मा, रामकुमार, अजय बेलवाल, विजेन्द्र सुयाल, भजन सिंह चौहान, गौरव बर्तवाल, लक्ष्मी नारायण भट्ट ,विशेष शर्मा राजेन्द्र सिंह राणा, प्रमोद नौटियाल, धर्मेंद्र चौधरी, कमल कुमार आदि उपस्थित रहे

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